नई दिल्ली, 24 अगस्त 2025: भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने Export Promotion Mission (2025-2031) के तहत अगले छह वर्षों में करीब 25,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका मकसद खासतौर पर MSME निर्यातकों को किफायती और आसान ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत का निर्यात लगातार बढ़ता रहे।
क्या है योजना?
सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय ने यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (EFC) को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा।
👉 योजना का लक्ष्य है अगले छह वर्षों में भारतीय निर्यात को व्यापक, समावेशी और टिकाऊ बनाना। इसके लिए न सिर्फ पारंपरिक तरीकों को मजबूत किया जाएगा, बल्कि निर्यातकों, खासकर एमएसएमई सेक्टर, के सामने आने वाली प्रमुख बाधाओं को भी दूर किया जाएगा।
दो सब-प्लान: ‘निर्यात प्रोत्साहन’ और ‘निर्यात दिशा’
इस मिशन को दो उप-योजनाओं के जरिए लागू करने की तैयारी है:
- निर्यात प्रोत्साहन (Export Promotion) – इसमें 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे।
- अगले छह सालों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज समानीकरण (Interest Equalisation Support)
- ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड सुविधा
- वैकल्पिक व्यापार वित्त साधनों को बढ़ावा
- नकदी की कमी से जूझ रहे निर्यातकों के लिए नई वित्तीय व्यवस्थाएं
- निर्यात दिशा (Export Disha) – इसमें 14,500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान होगा।
- गुणवत्ता मानकों के पालन के लिए लगभग 4,000 करोड़ का समर्थन
- विदेशी बाजारों का विकास और ब्रांडिंग
- लॉजिस्टिक और स्टोरेज की बेहतर सुविधाएं
- भारतीय उद्यमों को वैश्विक वैल्यू चेन में जोड़ने के लिए क्षमता निर्माण
क्यों है ज़रूरी?
अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में शुल्क और व्यापारिक प्रतिबंधों के चलते भारतीय निर्यातकों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम न केवल भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, बल्कि एमएसएमई को वैश्विक बाजारों में पैर जमाने का मौका भी देगा।
निवेशकों और निर्यातकों की उम्मीदें
यदि ईएफसी और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत के एक्सपोर्ट ग्रोथ स्टोरी में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
👉 साफ है कि सरकार का लक्ष्य भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाना है। इस योजना से न सिर्फ बड़े निर्यातकों को बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।







